मास मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म में 4 साल अनुभव लिये अंकुर कुमार श्रीवास्तव वेब पत्रकारिता में सक्रिय हैं। इन्हें राजनैतिक मुद्दों पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने दैनिक अखबार जनसत्ता में काम किया है और फिलहाल न्यूज बेबसाइट वनइंडिया में सीनियर जर्नलिस्ट के तौर पर कार्यरत हैं। कलम ही इनका शौक है और कलम ही इनकी पहचान।
कुंडा के डीएसपी जिया उल हक का जनाजा तो उठ गया मगर अपने पीछे कई सवाल छोड़ गया। सवाल ये कि क्या यूपी में अब कोई खून नहीं बहेगा? क्या यूपी में जुर्म की सूरत बदलेगी? आज से ठीक 9 दिन बाद अखिलेश यादव की सरकार के एक साल पूरे हो रहे हैं मगर इस एक साल में सूबे में जुर्म की तस्वीर और बदतर ही हुई है। 15 मार्च 2012 को अखिलेश यादव ने यूपी की बागडोर संभाली थी और शपथ ली थी कि वो उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदल देंगे। उन्होंने कहा था कि प्रदेश अपराध मुक्त होगा। मगर उनकी इस शपथ के सिर्फ 100 दिन बाद यानी कि 26 जून 2012 तक के आंकड़ों पर ध्यान दें तो यूपी में बलात्कार की 1164, हत्या की 370 , लूट के 920 और अपहरण के 356 मामले सामने आये। अब चुकि उनकी सरकार 365 दिन पूरा करने जा रही है तो सारे आंकड़ों को तीन गुना कर देना चाहिए।
यूपी में सत्ता की तस्वीर भले ही बदल जाए पर सत्ता पर काबिज लोग यूपी की तकदीर बदलने नहीं देते। वैसे तस्वीर बदले भी तो कैसे? जिन्हें कायदे से जेल में होना चाहिए जब उन्हीं को राज्य की जेलों का मालिक बना दिया जाएगा तो फिर ऐसे सूबे का तो ऊपर वाला ही मालिक होगा। राजा भैया तो याद हैं ना आपको? जी हां वही जो कई बार जेल हो आए हैं। और शायद उनके बार-बार जेल जाने के इसी तजुर्बे को देखते हुए अखिलेश यादव ने उन्हें राज्य की जेल का मंत्री ही बना दिया था। हत्या, लूट, अपहरण जैसे 45 संगीन मुकदमे झेल रहे रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया का नाम अब एक नये मामले में चर्चा में आया है।
राजा भैया पर आरोप है कि उन्होंने कुंडा के डिप्टी एसपी जिया उल हक की हत्या की साजिश रची थी। जिया उल हक की पत्नी परवीन आजाद ने पुलिस को इस संबंध में लिखित शिकायत भी दी है मगर राजा भैया को ना तो अबतक गिरफ्तार किया गया है और ना ही उनसे कोई पूछताछ हुई है। जाहिर है जब सामजवाद समाज की परवाह करना छोड़ दे, जब सरकार इंसाफ के बारे में सोचना छोड़ दे तो सबसे पहले मुख्यमंत्री पर सवाल उठता है। सवाल ये कि क्या यूपी की सत्ता संभाल नहीं पा रहे हैं अखिलेश यादव?
लेखक न्यूज वेबसाइट वनइंडिया हिंदी (OneIndia) के सीनियर जर्नलिस्ट हैं।
Sharad Lakhera
March 11, 2013 at 12:20 pm
यूपी में सत्ता की तस्वीर भले ही बदल जाए पर सत्ता पर काबिज लोग यूपी की तकदीर बदलने नहीं देते।