मास मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म में 4 साल अनुभव लिये अंकुर कुमार श्रीवास्तव वेब पत्रकारिता में सक्रिय हैं। इन्हें राजनैतिक मुद्दों पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने दैनिक अखबार जनसत्ता में काम किया है और फिलहाल न्यूज बेबसाइट वनइंडिया में सीनियर जर्नलिस्ट के तौर पर कार्यरत हैं। कलम ही इनका शौक है और कलम ही इनकी पहचान।
जिनके घर शीशे के होते हैं वो दूसरों पर पत्थर नहीं मारते
उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था बद से बदत्तर हो चुकी है। चौतरफा आलोचना से बचने के लिये मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बचाव में दिल्ली सरकार पर निशाना साध दिया है। अखिलेश यादव ने कहा है कि दिल्ली में कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्तर प्रदेश से भी बदत्तर है। अखिलेश यादव ने कहा कि दिल्ली के चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात रहती है मगर फिर भी वहां अपराध पर नियंत्रण नहीं है। देश की राजधानी दिल्ली की हालत तो उत्तर प्रदेश से भी खराब है। यूपी के युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बयान पर गौर करें तो उन्होंने एक तरह से यूपी की कानून-व्यवस्था की बदहाली को ही स्वीकार किया है। यह अलग बात है कि उन्होंने इससे भी बदतर एक अन्य प्रदेश का हवाला देकर यूपी के बदनुमा दाग को छिपाने की नाकाम कोशिश की है।
अखिलेश के इस टिप्पड़ी पर एक कहावत सही बैठती है कि ‘जिनके घर शीशे के होते हैं वो दूसरों की खिड़कियों पर पत्थर नहीं मारते’। यूपी के मौजूदा हालात की बात करें तो अखिलेश सरकार के राज में पिछले 306 दिनों में प्रदेश में अब तक 632 बलात्कार हो चुके हैं। ये वो मामले हैं जो दर्ज हुए हैं, अभी न जाने कितने हैं, जो पुलिस के रिकार्ड तक पहुंचे ही नहीं। अखिलेश सरकार के पांच साल के शासन के अभी एक साल पूरा होने वाला है। इस एक साल के भीतर प्रदेश में 9 दंगे हुए जिसमें दर्जनों लोगों की जाने गईं।
बिगड़ती कानून व्यवस्था और लचर कार्यप्रणाली का ताजा उदाहरण डीएसपी जियाउल हत्याकांड है। इस हत्याकांड में प्रदेश के पूर्व मंत्री और बाहुबली नेता रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया भी आरोपी हैं। दूसरी ओर दिल्ली में कानून-व्यवस्था की हालत भी एकदम पतली है। यहां भी आए दिन महिला पर जघन्य जुर्म की खबरें आती रहती हैं।